प्रतिक्रिया
@लघुकथा
--प्रतिक्रिया--
पहली घटना
"कल सड़क के किनारे ट्रक के चपेट में आ जाने से मुकुरु मर गया। उसकी मौत शायद तय थी।इसलिए उधर घर होने पर भी वहाँ सड़क किनारे आया था,लेकिन उसके पास ही दो बच्चें और थे जिनका घर वही था जो कैसे न कैसे तख़्त के नीचे घुस पार निकल गये और बच गये।"
इस बात को ध्यान से सुन रहे चार पांच लोगों में से एक ने कहा-बच्चों के नसीब ने साथ दिया सो बच गये।
दूसरे और तीसरे ने हांमी भर दी।बाकियों ने मूक सहमति दी।
दूसरी घटना
"उसकी औरत को पहले ही सरकारी हस्पताल न ले जाकर निजी हस्पताल ले जाते तो उस औरत का बच्चा न मरता।सब उसके पति का दोष है जो बाद में मरा हुआ बच्चा जन्मा। आज बच्चा जिंदा होता। आखिर बाद में उतना निजी हस्पताल में खर्चा हुआ।"
एक व्यक्ति को चार पाँच लोग सुन रहे थे पति को दोषी मानकर सब सन्तुष्ट थे।
शम्भू©
स्वरचित मौलिक रचना।
दिनांक -9 -01-2019
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