मेरे एहसास
मेरे एहसास (कविता)
1.
बुरा लगता है
जब सभ्य हाथों में प्लास्टिक की पन्नियों में
सब्जियाँ टंगे देखता हूँ
और देखता हूँ
अच्छे और शालीन कपड़ो में
सार्वजनिक जगहों पर करते धूम्रपान।
2.
हाँ, फिर बुरा लगता है जब,
विकास के नाम पर
बढ़िया बने सड़को को
एक साल में ही बुरी तरह से
क्षतिग्रस्त होते देखता हूँ
और बुरा लगता है जब
पत्रकार और सफेदपोशों को
दूसरी गलियों से बच निकलते देखता हूँ।
3.
खुद ही बनाते है,ऊँचे मकान और दुकान
बारिश का पानी ना ही निकलने को छोड़ते है स्थान
फिर चिल्लाते है,पानी भरे सड़कों पर क्यों
फंस जाते है,वाहन?
4.
हर साल पर्यावरण दिवस मनाते देखता हूँ
अच्छा लगता है
सड़क किनारे हजारों पेड़ हिलते देखता हूँ
सुंदर लगता है
लेकिन जाने क्यों बुरा लगता है
जब हरे छायादार हजारों पेड़
सड़क चौड़ीकरण के नाम पर
गिराये जाते देखता हूँ
वहाँ,जहाँ चौड़ीकरण
बिल्कुल नहीं चाहिए
और फिर करोड़ो खर्च कर
नये पेड़ लगाते देखता हूँ
5.
हाँ,हुक्मरानों की घोषणाएं और विज्ञापन
पढ़ सुन कर खुश होता हूँ
उसकी चर्चाए मैं भी खुशी से
कभी कभार कर देता हूँ
लेकिन बुरा लगता है जब
मुझे पत्नी के इलाज़
और बच्चों के शिक्षा के लिए
सरकारी में कम स्टाफ
और कम सुविधा का होना
बताया जाता है
6.
और दुःख होता है जब
घोर विपत्ति में भी हाथी
घोड़े पर आदमी
और फिर आस्था के स्मारको
भवनों पर करोड़ों
खर्च करते देखता हूँ।
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शम्भू©
रचना काल-27-06-2020 से 26-07-2020
सारण,गोपालगंज, बिहार
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