अजीब पाठक की कहानी-1
मैं फुर्सत के क्षणों में समाज में देखी हुई और स्वयं अनुभव की हुई घटनाओं पर लघुकथा, कहानी या कभी कभी कविता लिखता था।जाहिर है लिखता था तो अपने लिये तो लिखता नहीं था, इसलिए लिखे हुए को फेसबुक पर डाल देता था ताकि कम से कम मेरे मित्र पढ़ सकें।
कई बार कुछ अनजान लोग भी मुझसे जुड़ते चले गये। जुड़ने का कारण फेसबुक साहित्यिक समूहों में मेरा सक्रिय रहना भी था और कई बार मेरे लिखे को कई मित्र शेयर कर देते थे, जिससे साहित्यिक रुचि वाले लोग मुझसे जुड़ जाते थे।फिर वे मेरे पटल पर ही समय समय पर अपनी बात भी रखते थे।
यों तो मैं कई साहित्यिक ग्रुप में स्वयं दूसरों का पढ़ प्रतिक्रिया व्यक्त करने से नहीं चूकता था। इसलिए भी लेखक मित्र मुझसे जुड़ना चाहते थे ताकि उनको ईमानदार पाठक मिल सकें।
यहाँ ये सब बताने का एक ही उद्देश्य है कि एक अजीब साहित्यिक फेसबुक मित्र मुझसे जुड़ गया।'जुड़ गया' शब्द इसलिए कि वह मेरे से अनुभव,पढ़ाई,उम्र और पद में छोटा था।
फेसबुक पर मेरे लिखने का सिलसिला जारी रहा और उसके पढ़ने का सिलसिला तो जारी रहा ही साथ ही वह प्रतिक्रिया भी काफी तार्किक देता था।इससे मैं अपने को प्रफुल्लित मेहसूस करता।
ऐसा करते करीब पाँच साल बीत गए,और कब मैं और वो मेरा 'अजीब पाठक' मुझसे दिल से जुड़ गया पता नहीं चला। बात फेसबुक मैसेंजर से होते हुए बीच बीच में फोन पर भी होने लगी थी।
बाद में उसने मुझसे अपने व्यक्तिगत जीवन, परिवार औऱ अपने समाज के बारे में भी बताने लगा। मुझे काफी नई बात जानने की जिज्ञासा होती थी,लेखकीय नजर से।चूंकि वह गांवों में रहता था और मैं दिल्ली जैसे महानगर का रहनेवाला था, मेरी रुचि उसमें बढ़ती गई।
मैं यहाँ अजीब पाठक का नाम बताना नहीं चाहता हूँ क्योंकि ये किसी के प्राइवेसी का सवाल है,इसलिए मैं उसका नाम 'अजीब पाठक' ही रखता हूँ।
एक दिन अजीब पाठक ने मुझसे अपनी कहानी लिखने की गुज़ारिश की। लिखना मुझे पसन्द तो था,हैं भी,लेकिन ऐसे गम्भीर विषय को मैं लिखूंगा कैसे?
मेरे 45 वर्ष के होने तक हजारों साहित्यिक पुस्तकों और कइयों की समीक्षा पढ़ने के बाद भी ऐसे विषय पर एक भी पुस्तक या समीक्षा नहीं मिली थी।ऐसी कहानी थी,अजीब पाठक की।
ऐसे विषय को लिखने के लिये मैं भी हिम्मत जुटा नहीं पा रहा था क्योंकि इसके अपने खतरे थे।
तो क्या उसकी कहानी आगे बढ़ाई जाय या नहीं?
उस कहानी में खतरे वाली बात क्या हो सकती हैं?
To be continue as per your response...
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©शम्भू
23-08-21
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