जिन खोजा तिन पाइयां

●●जिन खोजा तिन पाइयां●



लीना पहले शौकिया लेखिका थी। सालों बीतने पर,अब वह चाहती थी,सभी प्रसिद्ध लेखिकाओं और लेखकों की तरह उसे भी दुनिया में साहित्यिक पहचान मिल जाये।


पति और उनके परिवार के अन्य सदस्य बहुत ज्यादा कमाते है,इसलिए घर पर रसोई और घर की अन्य व्यवस्था देखने की जरूरत नहीं है। नौकर औऱ कामवाली काफी है।इसलिए लीना को कोई टेंशन नहीं।


सालों से,बहुत संख्या में, गरीबों की समस्याओं और स्त्री आत्मनिर्भरता वाली रचनाओं को रचने के बाद भी लीना को मनमाफ़िक सफलता नहीं मिली।


 इसलिए उसने प्रसिद्ध लेखकों और लेखिकाओं की प्रसिद्ध रचनाओं पर शोध् किया।


परिणाम सामने था।


उसने पुरुषों के हरामीपन या कह लो कमीनेपन को अपनी रचनाओं में अलग-अलग रूप-रंग देना शुरू किया।


कबीरदास जी भी कह गये हैं, 'जिन खोजा तिन पाइयां,गहरे पानी पैठ' वही हुआ।

लीना की रचनाओं का मान-सम्मान देश-विदेश में होने लगा। 


हैरानी की बात यह थी कि उसके अधिकांश पाठक पुरुष थे। और कोई भी पुरूष पाठक खुद को छोड़कर सभी पुरुषों को हरामी और कमीना मानते थे। 

©शम्भू

मौलिक

01-09-2021


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