रविवार 20 मार्च 2022 को 3 पुस्तकों के समन्वित लोकार्पण समारोह में शामिल हुआ। जैसा कि मैं आपको पिछले पोस्ट में बता चुका हूँ,डॉ.राजू प्रसाद की दो पुस्तकों के बारे में 'राधा तू अस्वीकृत प्रेम की इंद्रधनुष' कनु कथ्य(खण्ड काव्य) और ग़ज़लियात 'हिज्र वो अजल,वस्ल वो हयात'। इन्हीं पुस्तकों को आज राजेन्द्र सरोवर,आशीर्वाद पैलेस,छपरा, सारण में लोकार्पित किया गया। मंच पर आदरणीया साहित्यकार व सम्पादक कश्मीरा सिंह,आद.आशा शरण जी,मंच के अध्यक्ष प्रो.श्री के.के द्विवेदी,प्रो.व प्रकाशक श्री पृथ्वीराज सिंह,प्रो. चिरंजीव लोचन,सेवानिवृत्त शिक्षक व साहित्यकार श्री शम्भू कमलाकर मिश्र व प्रो.डॉ राजू प्रसाद उपस्थित रहे थे। इसके बाद आदरणीय डॉ. राजू प्रसाद जी से मंच संचालन कर रहे सज्जन, निगम कसंल जी ने कहा कि आप अपनी पुस्तकों व अपने बारे में बतायें।इस पर प्रोफेसर साहब ने बहुत सरलता से कहा कि मैं अपने व पुस्तकों के बारे में स्वंय कैसे बता सकता हूँ। इसलिए उन्होंने अपने पुस्तकों व परिचय बताने के लिये मुझे आमंत्रित किया। इस पर मुझे रहीम जी का यह दोहा याद हो आया- बड़े बड़ाई ना कर...
व्यक्ति का जीवन खुली किताब सी हो या नहीं? अपने रोजी रोटी के सिलसिले में हाल ही में एक मित्र के पास एक रात मुझे रुकना पड़ा। मेरे मित्र अधिक सफल और मेधावी हैं,और उन्होंने अपने को साबित भी कर दिखाया है।यह भी कि उन्होंने अखिल भारतीय स्तर की कई परीक्षाओं में अपना दम दिखाया है। हमलोग रात का खाना खुद ही बना रहे थे। बीच बीच में इधर-उधर से मेरा तो कभी उनका मोबाइल बज उठता था। वैसे मैं किसी के निजी मामलें में दखल नहीं देता। फिर भी उनकी बात सुनकर लगा, दखल देना चाहिए। फिर भी चुप रहा। बात ये थी कि बातों ही बातों में मित्र ने मोबाईल पर दूसरे व्यक्ति को सलाह देते हुए कहा- "देखों,भाई! दूसरों के सामने खुली किताब मत बनों, किताब पढ़कर लोग फेंक देते हैं। अच्छा तुम्हीं बताओं,कोई किताब पढ़ने के बाद दुबारा हाथ लगाता हैं कि उठाकर कोने में रख देता है?" उधर से क्या जबाब फोन पर मिला पता नहीं।लेकिन मित्र की बात दूसरे व्यक्ति ने शायद मान ली थी। इसलिए मित्र ने ये कहकर अपनी बात खत्म की,"वही तो हम भी कह रहे हैं।आपके बारे में सब जानने के बाद आपकी कद्र नहीं रहेगी,किसी को।" मैं यह सुनकर मुस्कुराया,लगा मि...
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