व्यक्ति का जीवन खुली किताब सी हो या नहीं? अपने रोजी रोटी के सिलसिले में हाल ही में एक मित्र के पास एक रात मुझे रुकना पड़ा। मेरे मित्र अधिक सफल और मेधावी हैं,और उन्होंने अपने को साबित भी कर दिखाया है।यह भी कि उन्होंने अखिल भारतीय स्तर की कई परीक्षाओं में अपना दम दिखाया है। हमलोग रात का खाना खुद ही बना रहे थे। बीच बीच में इधर-उधर से मेरा तो कभी उनका मोबाइल बज उठता था। वैसे मैं किसी के निजी मामलें में दखल नहीं देता। फिर भी उनकी बात सुनकर लगा, दखल देना चाहिए। फिर भी चुप रहा। बात ये थी कि बातों ही बातों में मित्र ने मोबाईल पर दूसरे व्यक्ति को सलाह देते हुए कहा- "देखों,भाई! दूसरों के सामने खुली किताब मत बनों, किताब पढ़कर लोग फेंक देते हैं। अच्छा तुम्हीं बताओं,कोई किताब पढ़ने के बाद दुबारा हाथ लगाता हैं कि उठाकर कोने में रख देता है?" उधर से क्या जबाब फोन पर मिला पता नहीं।लेकिन मित्र की बात दूसरे व्यक्ति ने शायद मान ली थी। इसलिए मित्र ने ये कहकर अपनी बात खत्म की,"वही तो हम भी कह रहे हैं।आपके बारे में सब जानने के बाद आपकी कद्र नहीं रहेगी,किसी को।" मैं यह सुनकर मुस्कुराया,लगा मि...
काफी समय से यह देखने में आ रहा है कि धर्म को लेकर देश-विदेश में काफी गम्भीर बहसें हो रही है तो लाज़मी है कि किसी का भी ध्यान इस विषय पर केंद्रित हो जाय। असल में धर्म को लेकर ढिंढोरा पीटने वाले चाहे यूरोप के हो या इजरायल के हो या हो इस्लाम देश जैसे ईरान और पाकिस्तान के। और हाँ,भारत को कैसे छोड़ सकते है यहाँ तो अपनी जन्मभूमि और कर्मभूमि है। ये कूद-फांद मचाने वाले तथाकथित लोग वास्तव में अधार्मिक है,व्यापारी है। अब आप कहेंगे कि कैसे आप इस निष्कर्ष पर पहुँचे? तो मैं सीधा सा जबाब दूंगा कि हर व्यक्ति अपने हिसाब से जीता है और वह अपने लाभ के लिये कुछ भी करने पर उतारू हो जाता है।अर्थात वह अपने धर्म में रहते हुए धर्म विरुद्ध कार्य करता है।वह रिश्वत लेता है, देता है।वह निंदा प्रस्ताव पास करने में आगे रहता है जो एक प्रकार से महापाप की श्रेणी में आता है।इससे भी बात नहीं बनती तो आज का मानव किसी को ठोकने-पीटने से भी परहेज नहीं करता।कई बार तो वह हत्या भी कर देता है। यह सारे अधर्म वह स्वार्थवश करता है।हालांकि परस्त्रीगामी(पुरुषों का दूसरे की औरतों संग इन्द्रिय सुख) और परपुरुष गामी(दूसरे के आदमियों सं...
परसों शाम हरी सब्जियों के खेत में घास निकालते हुए, जब मेरे गाँव का दुलरुआ कुत्ता, मेरा हाल जानने पास आ गया तो दोनों की खुशी को देखते हुए, मैं उसके साथ सेल्फ़ी लेने पर विवश हो गया। मुझें आप सबो से यह साझा करते हुए अच्छा लग रहा है कि यह कुत्ता पासी टोले से पलायन कर हमारे गाँव में आकर बस गया है।इसलिए लोग इसे 'पासी कुत्ता' नाम से बुलाते है।हालांकि इस नाम से मुझे आपत्ति है क्योंकि अब कुछ सालों से वह टोला(गांव),चौधरी टोला के नाम से जाना जा रहा है। इसलिए इस कुत्ते का नाम भी 'चौधरी कुत्ता' होना चाहिए। चूंकि देश में नाम परिवर्तन का युग चल रहा है तो इस कुत्ते को 'चौधरी कुत्ता' बुलाने में कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। नीलगाय से खेतों की सुरक्षा हो या हनुमानजी(लंगूर) लोग से फसलों /लोगों के रसोई घरों की सुरक्षा,अपना काम मुस्तैदी से करता है। यह भी कि कुछ बच्चों का यह मनोरंजन का साधन भी है, उनके साथ खेलता भी है; वह भी मन से। कई बार देर रात को गाँव लौटने पर यह अजनबियों सा पेश आता है अर्थात मुझपर भी भौकने लगता है।लेकिन जैसे ही डांट सुनता है, कुई कुई करते हुए पूछ हिलाते...
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