गाँव का कुत्ता
परसों शाम हरी सब्जियों के खेत में घास निकालते हुए, जब मेरे गाँव का दुलरुआ कुत्ता, मेरा हाल जानने पास आ गया तो दोनों की खुशी को देखते हुए, मैं उसके साथ सेल्फ़ी लेने पर विवश हो गया।
मुझें आप सबो से यह साझा करते हुए अच्छा लग रहा है कि यह कुत्ता पासी टोले से पलायन कर हमारे गाँव में आकर बस गया है।इसलिए लोग इसे 'पासी कुत्ता' नाम से बुलाते है।हालांकि इस नाम से मुझे आपत्ति है क्योंकि अब कुछ सालों से वह टोला(गांव),चौधरी टोला के नाम से जाना जा रहा है। इसलिए इस कुत्ते का नाम भी 'चौधरी कुत्ता' होना चाहिए।
चूंकि देश में नाम परिवर्तन का युग चल रहा है तो इस कुत्ते को 'चौधरी कुत्ता' बुलाने में कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए।
नीलगाय से खेतों की सुरक्षा हो या हनुमानजी(लंगूर) लोग से फसलों /लोगों के रसोई घरों की सुरक्षा,अपना काम मुस्तैदी से करता है।
यह भी कि कुछ बच्चों का यह मनोरंजन का साधन भी है, उनके साथ खेलता भी है; वह भी मन से।
कई बार देर रात को गाँव लौटने पर यह अजनबियों सा पेश आता है अर्थात मुझपर भी भौकने लगता है।लेकिन जैसे ही डांट सुनता है, कुई कुई करते हुए पूछ हिलाते हुए पास आ जाता है।मुझें ऐसा लगता कि वह ऐसा करके मुझे ऐसा एहसास कराता है कि जब तक मैं जिंदा हूँ, गाँव की सुरक्षा को लेकर मुझपर विश्वास किया जा सकता है।
ऐसा समझकर मेरा रोम रोम पुलकित हो जाता है। मेरे चेहरे पर बड़ी मुस्कान के साथ आँखों में खुशी के आँसू आ जाते है, मैं उसके चिरायु होने और उत्तम स्वास्थ्य की कामना करने लग जाता हूँ।
बहरहाल,जैसाकि मैं आपको बता चुका हूँ,यह कुत्ता पूरे गाँव का दुलरुआ कुत्ता है,इसलिए सभी लोग इसके खाने पीने का ख्याल भी रखते है,इसका वाज़िब मान सम्मान करते है। बदले में वह पूरे लगन से गाँव के सेवा में हमेशा तत्पर रहता है।
दुलरुआ का अर्थ 'लाडला' है यहाँ।
◆
इति© श्री शम्भू उवाचः।😆🙏
Comments
Post a Comment