बदल गये है लोग (कविता)

बदल गये है लोग और बदल गये है झगड़े


पहले झगड़े होते थे 

घर के आस पास में

या चलते राह में

अब तो अजनबी भी लड़ने लगे है 

फेसबुक और व्हाट्स अप में


यह विचारों की क्रांति है या विचार ही नहीं

शब्द बने है तीर या शब्द ही नहीं


यहाँ भी तिल के ताड़ बनाये जाते है

कुछ लोग पक्ष तो कुछ विपक्ष में

 हो लड़वाते है

कुछ पढ़कर झगड़े के बोल

 दबी मुस्कान मुस्काते है


बहुत कम समझाते है

राई का पहाड़ नहीं बनाते है

जब ही कोई कड़वा बोले 

बेमतलब न उनसे बोले


यह तो अपने अहसास है शम्भू के

दिल पर लेकर आग सा न बोलेे


बदल गये है लोग बदल गये है झगड़े


इति श्री शम्भू उवाचः।

2/08/2018


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